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Showing posts from March, 2018

अनूदित शोध पत्र: तीसरी सहस्त्राब्दी में सैद्धांतिक जीव विज्ञान: सिडनी ब्रेनर

सिडनी ब्रेनर (द मॉलिक्यूलर साइंसेज़ इंस्टिट्यूट , बार्कली , यूएसए और किंग्स कॉलेज , केम्ब्रिज , यूके) २००२ में सिडनी ब्रेनर को आणविक जीव विज्ञान में अपने योगदान के लिए बॉब होर्वित्ज़ और जॉन सल्सटन के साथ नोबेल पुरस्कार दिया गया. उन्होंने सिनोरेहब्डिटिस एलिगेंस को वैज्ञानिक शोध के लिए उपयुक्त जीव-तंत्र के रूप में स्थापित किया. यह कृमि पारदर्शी, प्रयोगशाला में आसानी से फलने-फूलने वाला और जेनेटिक जोड़-तोड़ के लिए सुगम है; इस तंत्र ने शोध के लिए बहुत से रस्ते खोले और आज इस कारण से मष्तिष्क के निर्माण के बारे में हम बहुत कुछ जानते हैं. पर ब्रेनर के योगदान का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा सैद्धांतिक जीव विज्ञान में रहा है. ब्रेनर अपने समकालीन वैज्ञानिकों के काम को हमेशा बारीकी से समझते रहे और उन्होंने साधारण सी दिखने वाली खोजों के महत्तर प्रभाव दुनिया को सुझाए. उन्होंने क्रिक और बार्नेट के साथ मिलकर जीवों में सूचना के प्रवाह को समझाया. यहाँ अनूदित पत्र १९९९ में " फिलोसोफिकल ट्रांज़ेक्शन्स ऑफ़ रॉयल सोसाइटी लन्दन " में प्रकाशित हुआ. इस पत्र में उन्होंने जीव विज्ञान शोध से उत्पन...

वैज्ञानिक शोध पत्रिकाएँ हिंदी में क्यों नहीं छपती हैं?

क्या कारण है कि दुनिया के दूसरे सबसे विशाल भाषी समूह होने के बावज़ूद कोई भी वैज्ञानिक शोध पत्रिका भारतीय भाषाओँ में अपने शोध-पत्रों का अनुवाद करके प्रसारित नहीं करतीं है? नेचर और स्प्रिन्गर के विलय से बने प्रकाशन दानव की पत्रिका “नेचर” का प्रमुख हिस्सा विज्ञान की विविध शाखाओं में अत्याधुनिक शोध को प्रकाशित करता है. यह पत्रिका कोरिया, चीन और जापान जैसे देशों में, उनकी राष्ट्र भाषाओँ में अनूदित-प्रकाशित की जाती है. इसी प्रकाशन की पत्रिका “साइंटिफिक अमेरिकन”, जो कि विज्ञान में अभिरुचि रखने वाले सामान्य पाठक वर्ग के समक्ष नवीन वैज्ञानिक खोजों, अविष्कारों और उनसे उत्पन्न होने वाली विचारधारा को आकर्षक तरीक़े से पेश करती है. यह पत्रिका स्थानीय अनुवादकों और प्रकाशकों के सहयोग से तकरीबन बीस भाषाओँ में प्रकाशित की जाती है, जिनमे रूसी, ताईवानी और ब्राज़ीलियाई भाषाएँ शामिल हैं. नेचर की सालाना वेटेड फ्रेक्शनल काउंट इंडेक्स के हिसाब से भारत में शोध का आयतन ताइवान, ब्राज़ील और रूस जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे रहा है. यद्यपि इस मामले में हम चीन और अमेरिका जैसे देशों के आस-पास भी नहीं फटकते, हमारे यहाँ शोध...