सिडनी ब्रेनर (द मॉलिक्यूलर साइंसेज़ इंस्टिट्यूट , बार्कली , यूएसए और किंग्स कॉलेज , केम्ब्रिज , यूके) २००२ में सिडनी ब्रेनर को आणविक जीव विज्ञान में अपने योगदान के लिए बॉब होर्वित्ज़ और जॉन सल्सटन के साथ नोबेल पुरस्कार दिया गया. उन्होंने सिनोरेहब्डिटिस एलिगेंस को वैज्ञानिक शोध के लिए उपयुक्त जीव-तंत्र के रूप में स्थापित किया. यह कृमि पारदर्शी, प्रयोगशाला में आसानी से फलने-फूलने वाला और जेनेटिक जोड़-तोड़ के लिए सुगम है; इस तंत्र ने शोध के लिए बहुत से रस्ते खोले और आज इस कारण से मष्तिष्क के निर्माण के बारे में हम बहुत कुछ जानते हैं. पर ब्रेनर के योगदान का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा सैद्धांतिक जीव विज्ञान में रहा है. ब्रेनर अपने समकालीन वैज्ञानिकों के काम को हमेशा बारीकी से समझते रहे और उन्होंने साधारण सी दिखने वाली खोजों के महत्तर प्रभाव दुनिया को सुझाए. उन्होंने क्रिक और बार्नेट के साथ मिलकर जीवों में सूचना के प्रवाह को समझाया. यहाँ अनूदित पत्र १९९९ में " फिलोसोफिकल ट्रांज़ेक्शन्स ऑफ़ रॉयल सोसाइटी लन्दन " में प्रकाशित हुआ. इस पत्र में उन्होंने जीव विज्ञान शोध से उत्पन...
आधुनिक विज्ञान के महत्वपूर्ण शोध पत्रों का हिंदी अनुवाद और विज्ञान से सम्बंधित विविध विषयों पर बातचीत